(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

शान्तिपर्व (Mahabharat) - 13 अनुशासनपर्व


॥ श्रीः ॥
13.125. अध्यायः 125
अथ दानधर्मपर्व ॥ 1 ॥
Mahabharata - Anushaasana Parva - Chapter Topics
व्यासेन शुकम्प्रति ब्राह्मणेतरवर्णानां कपिलाक्षीरोपजीवनार्हत्वादिकथनम्॥ 1 ॥
Mahabharata - Anushaasana Parva - Chapter Text

`शुक उवाच।

क्षत्रियाश्चैव शूद्राश्च मन्त्रहीनाश्च ये द्विजाः।
कपिलामुपजीवन्ति कथमेतत्पितर्भवेत्॥ 13-125-1(86235)
श्रीव्यास उवाच। 13-125-2x(7155)
क्षत्रियाश्चैव शूद्राश्च मन्त्रहीनाश्च ये द्विजाः।
कपिलामुपजीवन्ति तेषां वक्ष्यामि निर्णयम्॥ 13-125-2(86236)
कपिलास्तूत्तमा लोके गोषु चैवोत्तमा मताः।
तासां दाता लभेत्स्वर्गं विधिना यश्च सेवते॥ 13-125-3(86237)
स्पृशेत कपिलां यस्तु दण्डेन चरणेन वा।
स तेन स्पर्शमात्रेण नरकायोपपद्यते॥ 13-125-4(86238)
मन्त्रेण युञ्ज्यात्कपिलां मन्त्रेणैव प्रमुञ्चते।
मन्त्रिहीनं तु यो युञ्जात्कृमियोनौ प्रसूयते॥ 13-125-5(86239)
प्रहाराहतमर्माङ्गा दुःखेन च जडीकृता।
पदानि यावद्गच्छेत तावल्लोकान्कृमिर्भवेत्॥ 13-125-6(86240)
यावन्तो बिन्दवस्तस्याः शोणितस्य क्षितिं गताः।
तावद्वर्षसहस्राणि नरकं प्रतिपद्यते॥ 13-125-7(86241)
मन्त्रेण युञ्ज्यात्कपिलां मन्त्रेण विनियोजयेत्।
मन्त्रहीनैरनुयुतो मञ्जयेत्तमसि प्रभो॥ 13-125-8(86242)
कपिलां येऽपि जीवन्ति बुद्धिमोहान्विता नराः।
तेऽपि वर्षसहस्राणि पतन्ति नरके नृप॥ 13-125-9(86243)
अथ न्यायेन ये विप्राः कपिलामुपयुञ्जते।
तस्मिंल्लोके प्रमोदन्ते लोकाश्चैषामनामयाः॥ 13-125-10(86244)
विधिना ये न कुर्वन्ति शूद्रास्तानुपधारय॥' ॥ 13-125-11(86245)

इति श्रीमन्महाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि पञ्चविंशत्यधिकशततमोऽध्यायः॥ 125 ॥


Mahabharat- Hindi (Devanagari) 100000 shlokas

www.sanatanadharm.com - play store app (sanatana dharm)

"Bharathiya Sanatana Dharm" and Sanatana Dharmam & Dharmo rakshati Rakshitha logo are our trademarks. Unauthorised use of "Sanatana Dharmam & Dharmo rakshoati Rakshitha" and the logo is not allowed. Copyright © sanatanadharm.com All Rights Reserved . Made in India.